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Sourabh Tyagi
मंत्रिमंडल ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिये ‘कपास उत्पादकता मिशन’ हेतु ₹5,659 करोड़ के व्यय को मंज़ूरी दी है। यह पहल स्थिर बनी हुई उपज की समस्या को दूर करने, कीट-जनित चुनौतियों के प्रभाव को कम करने, गुणवत्ता में सुधार करने तथा भारत को कपास उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिये तैयार की गई है, साथ ही वैश्विक वस्त्र बाज़ारों में भारत की प्रतिस्पर्द्धात्मकता को बढ़ाने का भी उद्देश्य रखती है। सारांश केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2026-31 के लिये ₹5,659 करोड़ के ‘कपास उत्पादकता मिशन’ को मंज़ूरी दी है, जिसका उद्देश्य जलवायु-प्रतिरोधी बीजों, आधुनिक कृषि तकनीकों, यंत्रीकरण एवं मूल्य शृंखला सुधारों के माध्यम से कपास की उपज, गुणवत्ता और किसानों की आय में वृद्धि करना है। यह पहल भारत के ‘खेत से विदेश तक/Farm to Foreign’ 5F विज़न को भी प्रोत्साहित करती है। यद्यपि भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा कपास उत्पादक है, फिर भी यह कम उत्पादकता, कीट संक्रमण, जलवायु संवेदनशीलता, छोटे एवं खंडित खेतों तथा कमज़ोर प्रसंस्करण अवसंरचना जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। अतः सिंचाई सुधार, यंत्रीकरण, विस्तार सेवाओं
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